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11 महिलाओं सहित 29 नक्सलियों ने किया आत्म समर्पण

छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास एवं आत्म समर्पण नीति से प्रभावित, पुलिस द्वारा चलाये गये नक्सल विरोधी अभियान से दबाव में आकर व  समाज की मुख्य धारा में शामिल होने की इच्छा, आंध्रप्रदेश के बड़े नक्सली लीडरों की प्रताडऩा एवं भेदभाव से प्रताडि़त होकर छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन 11 महिला नक्सली समेत कुल 29 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष बगैर हथियार के आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पित सभी माओवादी जनमिलिशिया सदस्य हैं और छत्तीसगढ़ के मूल निवासी हैं। 
बस्तर आईजी विवेकानंद सिंहा एवं सुकमा एसपी अभिषेक मीणा ने बताया कि उक्त 29 आत्मसमर्पित नक्सली कोंटा एरिया कमिटी में काफी समय से सक्रिय थे व इनमें 11 महिला नक्सली भी शामिल हैं। आत्मसमर्पण से निश्चित ही क्षेत्र के नक्सलियों के मनोबल में गिरावट आएगी। श्री मीणा ने बताया कि सभी समर्पित नक्सलियों को छत्तीसगढ़ शासन की राहत एवं पुनर्वास योजना के तहत सहायता मुहैया करवायी जाएगी।  aआत्मसमर्पित नक्सलियों ने पुलिस को बताया कि बड़े नक्सली लीडरों में विचारधारा से भटककर पैसे कमाने व हिन्सा की प्रवृति बढ़ी है एवं विलासिता की प्रवृति बढ़ गई है। बड़े नक्सली कमाण्डर स्थानीय लीडर पर दबाव बनाकर पुलिस पर हमला करने हेतु उकसाते हैं व गांव के युवकों को जो पुलिस से जुडऩा चाहते हैं, उनकी हत्या करवाने हेतु उकसाते हैं। माओवादियों द्वारा की जाने वाली वसूली का एक बड़ा हिस्सा, बड़े नक्सली कमाण्डर अपने साथ ले जाते हैं। लोकल संगठन चलाने के लिए जितने पैसे दिये जाते हैं, वह अपर्याप्त होता है। वर्तमान में गांव के लोगों में भी नक्सली विचारधारा को लेकर काफ ी मतभेद उभरकर सामने आए हैं और ग्रामीण भी खुलकर नक्सलियों का विरोध कर रहे हैं  व नक्सली भी अभी बंदूक के दम पर ग्रामीणों का शोषण कर रहे हैं, कोई भी ग्रामीण नक्सली संगठन से जुडऩे को तैयार नहीं है। नक्सली संगठन में महिलाओं का शोषण आम बात है। नक्सली आजकल शोषण के लिए ही ज्यादातर महिलाओं की भर्ती पर जोर दे रहे हैं, जिससे ग्रामीण युवक आकर्षित होकर नक्सली संगठन से जुड़ सकें।

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