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नक्सलवाद व जंगलों ने रोकी बस्तर के 95 गांवों की रोशनी

हिंसक नक्सली घटनाओं के लिए बदनाम रहे बस्तर के दुर्गम इलाकों में बिजली पहुंचाने की सरकार की योजना को झटका लग सकता है। प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) के तहत राज्य सरकार प्रदेश के हर घर में बिजली पहुंचाने की कवायद में जुटी है।बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों और अबूझमाड़ तक में बिजली के तार खींचे जा रहे हैं। लेकिन सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और बीजापुर जिले के कुल 95 गांव ऐसे हैं जिनमें नक्सली खतरे के अलावा कठिन भौगालिक स्थितियां भी रोशनी पहुंचाने के आड़े आ रही हैं। अब इन गांवों में 200 किलोवाट के सोलर लैंप बांटने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इन सोलर लैंपों से बल्ब जलाने के साथ ही टीवी और मोबाइल फोन रिचार्ज भी किया जा सकता है। हालांकि सोलर लैंप बांटने का खतरा भी है। नक्सल प्रभावित गांवों में सरकारी सोलर लैंप का उपयोग नक्सली करते रहे हैं। ग्रामीण विद्युतीकरण विभाग के सूत्रों ने बताया कि जिन 95 गांवों में बिजली पहुंचाने का काम लगभग असंभव माना जा रहा है उनमें सबसे ज्यादा 67 गांव सुकमा जिले के हैं। सुकमा इन दिनों नक्सली हिंसा का केंद्र बना हुआ है। सुकमा के अलावा दंतेवाड़ा जिले के चार गांव, बीजापुर जिले के 23 गांव और नारायणपुर जिले के एक गांव में बिजली पहुंचाना मुश्किल माना जा रहा है। ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना के तहत राज्य सरकार इस साल 838189 घरों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए 8.38 करोड़ की योजना बनाकर केंद्र सरकार को भेजी गई है।

पिछले दिनों रायपुर में हुई ग्रामीण विद्युतीकरण प्राधिकरण और छत्तीसगढ़ सरकार के अफसरों के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में बस्तर के 95 गावों का मुद्दा उठा था। राज्य विद्युत वितरण कंपनी के अफसरों ने बैठक में बताया कि नक्सल हिंसा से प्रभावित गांवों को ग्रिड से जोड़ना मुश्किल काम है। ऊंचे पहाड़ों, नदी-नालों और घने जंगलों के बीच बसे गांवों तक विभाग के कर्मचारियों का पहुंचना ही मुश्किल है। ऐसे में यहां तक लाइन बिछाना जोखिम भरा काम हो सकता है।

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