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छत्तीसगढ़ पर उपकार नहीं कर रहा रेल मंत्रालय

 

प्रबल विशेष  

संदीप शुक्ला 

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी ने आज रायपुर रेलवे स्टेशन को एक बड़ी सौगात देने की घोषणा की। रायपुर प्रवास के दौरान उन्होंने कहा कि रायपुर रेलवे स्टेशन में अब डॉक्टर की तैनाती की जाएगी। ये सालो पुराना प्रस्ताव था। हर साल न जाने कितने रेलयात्री बीमारी की स्थिति में रायपुर रेलवे स्टेशन से गुजरते हैं। किंतु न रायपुर, न ही दुर्ग और नागपुर के पहले तक इन्हें किसी भी तरह के चिकित्सक की सुविधा नहीं मिल पाती। टे्रनों के आरक्षण के समय पर्ची में चिकित्सक वाला कॉलम मानो केवल औपचारिकता निभाने के लिए ही होता है। कभी आपात स्थिति में भी टीटी के पास भी ये जानकारी नहीं होती कि टे्रन में कोई चिकित्सक, यात्री के रुप में है कि नहीं! जबकि ऐसे तमाम आरक्षण की स्लीप में ये विकल्प दिया होता है। कभी इमरजेंसी हो तो टीटी सीधे टे्रन से उतरने की ही सलाह देते आए हैं। राजधानी बनने के बाद रायपुर रेलवे स्टेशन सहित रायपुर रेलवे मंडल में विकास के काम तो ढेरों हुए, किंतु स्वास्थ्व सुविधाओं की सदैव से ही उपेक्षा की गई। सालों तक प्रस्ताव भेजे जाने के बाद लगभग साल भर पहले ही रायपुर रेलवे स्टेशन पर दवाईयों के लिए एक छोटा सा काउंटर खोला गया। जबकि हर-बड़े छोटे स्टेशन पर दवाईयों की सुविधा दी जानी चाहिए। किंतु जिस काम में कमाई न हो, रेलवे वो काम करने से पहले हजारों बार सोचता है! बिलासपुर जोन के जितने भी रेलवे सलाहकार बोर्ड के सदस्य हैं, वो सभी राजनीतिक हितों से बंधे हुए हैं। अधिकतर तो केवल आरक्षण को कंफर्म करवाने तक की सीमा बांधकर रखे हैं। बोर्ड की बैठकों में न इनके द्वारा ऐसा कोई प्रस्ताव दिया जाता है न ही कभी प्रस्ताव दिए जाने की स्थिति में उसे पूरा करवाने का दबाव डलवाने का प्रबंध ये कर पाते हैं। सदस्यों की तो छोडि़ए, यहां के जनप्रतिनिधियों की भी रेलवे में नहीं चलती। विधायक-सांसद सालों तक केवल एक ही प्रस्ताव को स्वीकृत कराने के लिए एडी-चोटी का जुगाड़ जमाने के बाद भी खाली हाथ रहते हैं!!! छत्तीसगढ़ के हितों को लेकर यहां कांग्रेस-भाजपा में कोई बिखराव नहीं दिखता। जो प्रस्ताव सांसदों के द्वारा भेजे जाते हैं, उन्हें लेकर उनके विपक्षी दल की ओर से कभी कोई आपत्ति आई हो, ऐसा कभी सुनाई नहीं पड़ा। बावजूद स्थिति सब जानते हैं। रेलवे मंत्रालय में छत्तीसगढ़ के नेताओं की स्थिति कैसी है, ये सालों से भेजे जाने वाले प्रस्तावों और रेल बजट के ओपन होने के बाद की स्थितियों को देखकर समझा जा सकता है। पूरे देश में बिलासपुर रेलवे जोन ही सर्वाधिक कमाई देने वाला जोन है। कुल राजस्व में 11 प्रतिशत कमाई बिलासपुर जोन से जाती है। बावजूद इस जोन और रायपुर मंडल को क्या मिला, इस विषय पर केवल चिंता व्यक्त करने के अतिरिक्त और किया भी क्या गया है? कुल जमा, छत्तीसगढ़ में बड़ी-बड़ी बाते करने वाले जनप्रतिनिधियों की रेल मंत्रालय के सामने कभी से नहीं चली। आज छत्तीसगढ़ में रेल के विकास की जो बातें की जाती है, वो सभी व्यवसायिक विकास अधिक है। जिन रेल पटरियों के विस्तार की बातें की जाती है, उसकी वास्तविकता किसी से छिपी नहीं है। रेल मंत्रालय को राज्य सरकार पूरा सहयोग कर रही है। किंतु उसके बदले में राज्य को क्या मिल रहा है? न तो उस सरकार के नेताओं के दिए प्रस्ताव को रेल मंत्रालय कोई भाव देता है, न ही अपनी ओर से यहां यात्री सुविधाओं में विकास की कोई ठोस पहल की जाती है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के तीन लाख से अधिक रेल यात्रियों को केवल परेशानियों को झेलने के अतिरिक्त और कुछ नहीं मिल पाता। इन सबके बीच अगर अब रेल मंत्रालय यहां कुछ देता भी है तो मंत्रालय को ये ध्यान में रखना चाहिए कि वो छत्तीसगढ़ पर कोई उपकार नहीं कर रहा है!

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